तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के पास कांची गाचीबौली क्षेत्र में लगभग 400 एकड़ जंगल की कटाई शुरू कर दी है, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों में गहरी चिंता पैदा हो गई है। यह क्षेत्र जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और शहरी क्षेत्र में कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने इस जंगल की कटाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे पारिस्थितिक संतुलन के लिए खतरा बताया है। इस मुद्दे पर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकार को जंगलों की कटाई पर अस्थायी रूप से रोक लगाने का आदेश दिया है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह भूमि बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि विकास के नाम पर पर्यावरण का विनाश उचित नहीं है।
इस कदम के खिलाफ छात्रों, पर्यावरणविदों और आम जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। याचिकाएं दाखिल की गई हैं और पर्यावरण बचाने के लिए ऑनलाइन अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
यह मामला दर्शाता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। जैसे-जैसे कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इसका प्रभाव भविष्य की नीतियों और पर्यावरणीय संरक्षण उपायों पर भी पड़ सकता है।