पुणे जर्मन बेकरी कांड: एक दशक बाद भी ताज़ा यादें, बॉम्बे उच्च न्यायालय का हिमायत बेग को राहत देने से इनकार।

Vikash Kumar
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13 फरवरी 2010 की शाम पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित जर्मन बेकरी में एक भीषण विस्फोट हुआ, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस धमाके में 17 लोगों की मौत हुई और 60 से अधिक लोग घायल हुए। यह बेकरी स्थानीय और विदेशी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय थी, विशेषकर ओशो आश्रम और यहूदी चाबाद हाउस के निकट होने के कारण।

शाम 6:50 बजे के करीब, बेकरी में एक लावारिस बैग में रखा विस्फोटक उपकरण फटा, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बेकरी का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया। मृतकों में कई युवा और विदेशी नागरिक शामिल थे, जो वहां के नियमित ग्राहक थे।

जांच और कानूनी प्रक्रिया

महाराष्ट्र एंटी-टेररिज़्म स्क्वाड (ATS) ने इस मामले की जांच की और हिमायत बेग को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। उन्हें 2010 में गिरफ्तार किया गया और 2013 में दोषी ठहराया गया। हालांकि, 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण उनकी सजा को रद्द कर दिया।

वर्तमान स्थिति

इस घटना के 15 साल बाद भी, जर्मन बेकरी कांड पुणे के निवासियों और पीड़ितों के परिवारों के लिए एक दर्दनाक याद बना हुआ है। हालांकि बेकरी को पुनर्निर्मित किया गया है, लेकिन उस दिन की भयावहता आज भी लोगों के दिलों में ताज़ा है।

2010 में पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित जर्मन बेकरी में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना में 17 लोगों की मौत हुई और 60 से अधिक घायल हुए। एक दशक बाद भी, यह घटना पुणे के निवासियों के लिए एक दर्दनाक स्मृति बनी हुई है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की सदस्यता वाली खंडपीठ ने हिमायत बेग को राहत देने से मना कर दिया।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने साल 2010 के जर्मन बेकरी विस्फोट मामले में दोषी हिमायत बेग को राहत देने से इनकार कर दिया है। हिमायत बेग ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया था कि उसे नासिक केंद्रीय कारागार में एकांत कारावास में रखा गया है। वह बीते 12 साल से जेल में है और एकांत कारावास में रहने की वजह से उसे मानसिक आघात हो रहा है। हिमायत बेग ने अपनी याचिका में उसे एकांत कारावास से निकालने की मांग की थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने इसका आदेश देने से इनकार कर दिया।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने साल 2010 के जर्मन बेकरी विस्फोट मामले में दोषी हिमायत बेग को राहत देने से इनकार कर दिया है। हिमायत बेग ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया था कि उसे नासिक केंद्रीय कारागार में एकांत कारावास में रखा गया है। वह बीते 12 साल से जेल में है और एकांत कारावास में रहने की वजह से उसे मानसिक आघात हो रहा है। हिमायत बेग ने अपनी याचिका में उसे एकांत कारावास से निकालने की मांग की थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने इसका आदेश देने से इनकार कर दिया। 

राहत देने से उच्च न्यायालय का इनकार
बॉम्बे उच्च न्यायालय की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की सदस्यता वाली खंडपीठ ने हिमायत बेग को राहत देने से मना कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि ‘जैसा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया है, इस स्तर पर मानसिक आघात जैसी कोई बात नहीं है।’ हालांकि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि हिमायत बेग को जेल के भीतर नियमों और कानून के मुताबिक कुछ काम दिया जा सकता है। बता दें कि एकांत कारावास में कैदी को अन्य कैदियों से अलग रखा जाता है और अधिकतर समय उसे जेल की चारदीवारी में ही कैद रखा जाता है। गंभीर अपराध जैसे हत्या या बम धमाके के दोषियों को एकांत कारावास में रखा जाता है। 

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