प्रयागराज : महाकुंभ 2025 ने आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों में नया इतिहास रच दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 19 फरवरी दोपहर 2 बजे तक 56.25 करोड़ श्रद्धालु गंगा में पवित्र स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “महाकुंभ, सनातन धर्म और मां गंगा पर निराधार आरोप लगाना 56 करोड़ लोगों की आस्था का अपमान है।”
लेकिन यह आयोजन सिर्फ आध्यात्मिक नहीं रहा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) के अनुसार, महाकुंभ 2025 से अब तक करीब 3 लाख करोड़ रुपये (360 अरब अमेरिकी डॉलर) का कारोबार हुआ है।
आस्था से अर्थव्यवस्था तक: महाकुंभ बना आर्थिक उछाल का केंद्र
CAIT के महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ ने आस्था और व्यापार के बीच गहरा संबंध स्थापित कर दिया है। इस आयोजन के चलते स्थानीय व्यापार में बड़ा उछाल देखा गया है। महाकुंभ थीम पर आधारित उत्पादों की भारी मांग देखी गई, जिनमें शामिल हैं:
- डायरी, कैलेंडर और स्टेशनरी
- जूट बैग और धार्मिक पोशाक
- पूजा सामग्री और हस्तशिल्प उत्पाद
ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीतियों के चलते इन वस्तुओं की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।
प्रारंभिक अनुमान से अधिक हुआ कारोबार और श्रद्धालुओं की संख्या
महाकुंभ के शुरुआती अनुमानों में 40 करोड़ श्रद्धालुओं और 2 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान था। लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे कहीं आगे निकल गए। 18 फरवरी तक श्रद्धालुओं की संख्या 56 करोड़ पार कर चुकी है और महाकुंभ के अंत तक 60 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।
इस बढ़ती संख्या के साथ कारोबार भी 3 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है। इसके चलते उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में यह आयोजन महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
महाकुंभ से बढ़े रोजगार के अवसर
महाकुंभ 2025 के कारण विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां देखी गईं। इनमें शामिल हैं:
- होटल और आतिथ्य उद्योग (होटल, गेस्टहाउस, धर्मशालाएं, टूर ऑपरेटर्स)
- भोजन एवं पेय उद्योग (रेस्तरां, स्ट्रीट फूड, प्रसाद सामग्री)
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स (टैक्सी, ई-रिक्शा, ट्रेनों में बढ़ी मांग)
- धार्मिक वस्त्र और पूजा सामग्री
- स्वास्थ्य और वेलनेस सेवाएं (योग, ध्यान केंद्र, आयुर्वेदिक उत्पाद)
- मीडिया, विज्ञापन और मनोरंजन उद्योग
- सुरक्षा सेवाएं (CCTV, AI-आधारित निगरानी तकनीक)
प्रयागराज से अयोध्या, काशी और मथुरा तक फैला आर्थिक लाभ
महाकुंभ से जुड़े आर्थिक लाभ केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इसके प्रभाव को 150 किलोमीटर के दायरे में महसूस किया गया। इसके अलावा, अयोध्या, काशी, मथुरा और विंध्याचल में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पर्यटन और व्यापार में जबरदस्त वृद्धि देखी गई।
इससे इन शहरों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए।
CM योगी आदित्यनाथ ने मृतकों को दी श्रद्धांजलि

महाकुंभ 2025 में कुछ दुर्घटनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं में श्रद्धालुओं की मृत्यु भी हुई है। इस पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के प्रति संवेदना प्रकट की और उनके परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
निष्कर्ष: महाकुंभ 2025 – आस्था, व्यापार और विकास का संगम
महाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ है।
इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया है, जिससे न केवल प्रयागराज बल्कि पूरे राज्य में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
महाकुंभ 2025 ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब आस्था, संस्कृति और व्यापार एक साथ आते हैं, तो नए आर्थिक और सामाजिक कीर्तिमान स्थापित होते हैं।