प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊँचाइयाँ,मॉरीशस स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गांधी का योगदान

Vikash Kumar
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 से 12 मार्च 2025 तक मॉरीशस का दो दिवसीय राजकीय दौरा किया। यह उनकी 2015 के बाद मॉरीशस की दूसरी यात्रा थी, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है।

मुख्य कार्यक्रम और उपलब्धियाँ:

  • राष्ट्रीय दिवस समारोह में भागीदारी: प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के 57वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान, उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नविन रामगूलम से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की।
  • उच्चतम नागरिक सम्मान प्राप्ति: प्रधानमंत्री मोदी को मॉरीशस सरकार द्वारा ‘न्यू क्यूरेसियोन’ (Order of the Star and Key of the Indian Ocean) से सम्मानित किया गया, जो देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान भारत और मॉरीशस के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है।
  • आठ समझौतों पर हस्ताक्षर: दोनों देशों के बीच आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और सांस्कृतिक विनिमय से संबंधित समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है।
  • चागोस द्वीपसमूह पर समर्थन: प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के चागोस द्वीपसमूह पर संप्रभुता के दावे का समर्थन किया, जो हाल ही में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना है। यह भारत की क्षेत्रीय साझेदारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रणनीतिक और वैश्विक संदर्भ:

मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति और भारत के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए, इस यात्रा को रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से, चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के अधिकारों के समर्थन से भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों में एक नया आयाम जुड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। यह यात्रा न केवल आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया है। राष्ट्रीय दिवस समारोह में भागीदारी, उच्चतम नागरिक सम्मान प्राप्ति, और महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर से यह यात्रा ऐतिहासिक बन गई है। इसके अतिरिक्त, चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के अधिकारों के समर्थन से भारत की क्षेत्रीय साझेदारों के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

मॉरीशस स्वतंत्रता दिवस 2025: विविधता और एकता का उत्सव

12 मार्च 2025 को मॉरीशस ने अपनी स्वतंत्रता के 57 वर्षों का जश्न मनाया.

स्वतंत्रता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

मॉरीशस, जो पहले डच, फ्रेंच और ब्रिटिश उपनिवेशों का हिस्सा रहा है, ने 12 मार्च 1968 को स्वतंत्रता प्राप्त की। यह दिन मॉरीशस के लोगों की संघर्ष और एकता का प्रतीक है, जिसने उन्हें अपनी पहचान और स्वशासन दिलाया।

2025 के उत्सव की विशेषताएँ:

  • ध्वजारोहण समारोह: राजधानी पोर्ट लुइस में चंप डे मार्स रेसकोर्स पर आधिकारिक ध्वजारोहण हुआ, जहाँ पहली बार 1968 में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: दिवस भर पारंपरिक नृत्य, संगीत और नाटक प्रस्तुत किए गए.
  • प्रकाश और सजावट: शहरों और गांवों को रंग-बिरंगे दीपों और सजावट से सजाया गया.

मॉरीशस की स्वतंत्रता दिवस पर दुनिया भर से शुभकामनाएँ प्राप्त हुईं। संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने मॉरीशस के राष्ट्रपति को बधाई संदेश भेजे.

स्वतंत्रता दिवस के अवसर:

यह दिन मॉरीशस की विविधता, एकता और प्रगति का प्रतीक है। देश ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई है। स्वतंत्रता दिवस के उत्सव ने मॉरीशसवासियों की गर्व और एकजुटता को प्रदर्शित किया

मॉरीशस स्वतंत्रता दिवस 2025 ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, एकता और प्रगति को प्रदर्शित किया। आधिकारिक ध्वजारोहण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और अंतर्राष्ट्रीय शुभकामनाओं ने इस दिन को विशेष बनाया

मॉरीशस स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गांधी का योगदान: एक ऐतिहासिक संबंध

मॉरीशस, एक द्वीपीय राष्ट्र, ने 12 मार्च 2025 को अपनी स्वतंत्रता के 57 वर्षों का जश्न मनाया। यह दिन न केवल मॉरीशस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि महात्मा गांधी के साथ इसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी हैं।

महात्मा गांधी का मॉरीशस से संबंध:

महात्मा गांधी ने 1896 में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करते समय मॉरीशस के भारतीय प्रवासियों के कठिनाइयों के बारे में सुना। उनकी प्रेरणा से, मॉरीशस में कई सामाजिक और राजनीतिक सुधार हुए, जो स्वतंत्रता संग्राम की नींव बने।

स्वतंत्रता संग्राम में गांधीवादी सिद्धांत:

मॉरीशस के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों का महत्वपूर्ण योगदान था। स्थानीय नेताओं ने इन सिद्धांतों को अपनाया, जिससे शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को मजबूती मिली।

स्वतंत्रता दिवस पर गांधीजी की याद:

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, मॉरीशस में महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उनके योगदान को याद करते हुए, देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो उनकी शिक्षाओं और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को सम्मानित करते हैं।

मॉरीशस की स्वतंत्रता दिवस की खुशियाँ महात्मा गांधी के योगदान के बिना अधूरी होतीं। उनकी शिक्षाएँ और नेतृत्व ने मॉरीशस के स्वतंत्रता संग्राम को आकार दिया, और आज भी उनकी विरासत मॉरीशस की सामाजिक और सांस्कृतिक धारा में जीवित है।

मॉरीशस की स्वतंत्रता दिवस 2025 महात्मा गांधी के योगदान को याद करने और सम्मानित करने का अवसर है। उनकी शिक्षाओं और नेतृत्व ने मॉरीशस के स्वतंत्रता संग्राम को आकार दिया, और आज भी उनकी विरासत देश की सामाजिक और सांस्कृतिक धारा में जीवित है।

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