मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री, हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार गए। उन्होंने अपनी पारंपरिक पटपड़गंज सीट के बजाय जंगपुरा से चुनाव लड़ा, जहां उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार तरविंदर सिंह मारवाह ने 675 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव आयोग के अनुसार, सिसोदिया को 38,184 वोट मिले, जबकि मारवाह को 38,859 वोट प्राप्त हुए।
मनीष सिसोदिया की हार के पीछे कई कारण रहे:
- विधानसभा क्षेत्र में बदलाव – सिसोदिया 2013 से पटपड़गंज सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने जंगपुरा से चुनाव लड़ा। यह कदम रणनीतिक रूप से लिया गया माना जा रहा है, क्योंकि वे एंटी-इन्कम्बेंसी और कानूनी समस्याओं का सामना कर रहे थे।
- कानूनी चुनौतियाँ और सार्वजनिक छवि – दिल्ली शराब नीति मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण फरवरी 2023 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, और अगस्त 2024 तक वे न्यायिक हिरासत में रहे। इसका असर उनकी सार्वजनिक छवि पर पड़ा।
- एंटी-इन्कम्बेंसी और बीजेपी की बढ़त – AAP सरकार के दस साल पूरे होने के बाद मतदाताओं में असंतोष बढ़ा। बीजेपी ने इस नाराजगी का फायदा उठाया और दिल्ली में 70 में से 47 सीटें जीतकर AAP के दबदबे को खत्म कर दिया।
सिसोदिया की यह करीबी हार जंगपुरा में चुनावी प्रतिस्पर्धा और दिल्ली की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है।