हाल ही में, अमेरिका और रूस के शीर्ष अधिकारियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना और दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार करना था। इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज, और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और राष्ट्रपति पुतिन के सलाहकार यूरी उशाकोव के साथ वार्ता की।
सऊदी अरब का चयन क्यों?
सऊदी अरब का चयन इस वार्ता के लिए कई कारणों से किया गया:
- स्थिरता और मध्यस्थता की भूमिका: सऊदी अरब ने हमेशा मध्य पूर्व में एक स्थिर और प्रभावशाली भूमिका निभाई है। यहां की तटस्थ स्थिति और प्रभावशाली कूटनीतिक संबंधों के कारण, यह दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए उपयुक्त स्थल माना गया।
- अमेरिका और रूस के साथ संबंध: सऊदी अरब के अमेरिका और रूस दोनों के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, जिससे यह दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायक है।
- भौगोलिक स्थिति: सऊदी अरब की भौगोलिक स्थिति, विशेषकर मध्य पूर्व में, अमेरिका और रूस दोनों के लिए सुलभ है, जिससे यात्रा और बैठक की सुविधा बढ़ती है।
यूक्रेन युद्ध पर चर्चा:
इस बैठक में, यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा की गई। रूस ने सुरक्षा गारंटी की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि अमेरिका ने यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की बात की। हालांकि, इस वार्ता में यूक्रेनी प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया, जिससे कीव में असंतोष है।
यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया:
यूरोपीय देशों ने इस वार्ता को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ यूरोपीय देशों को चिंता है कि बिना उनकी भागीदारी के कोई समझौता रूस के लिए लाभकारी हो सकता है, जिससे भविष्य में रूस की आक्रामकता बढ़ सकती है।
रूस की सैन्य गतिविधियां:
इस वार्ता के दौरान, रूस ने यूक्रेन पर 176 ड्रोन से हमला किया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। यूक्रेनी सेना ने दावा किया कि उन्होंने 103 ड्रोन मार गिराए, जबकि 67 ड्रोन अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचे।
सऊदी अरब में आयोजित यह वार्ता अमेरिका और रूस के बीच संबंधों में सुधार और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां हैं, विशेषकर यूक्रेनी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति और रूस की सैन्य गतिविधियों के कारण। आगे की दिशा इन वार्ताओं के परिणामों पर निर्भर करेगी।
अमेरिका और रूस के शीर्ष अधिकारियों ने सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और संबंधों में सुधार के लिए वार्ता की। इस बैठक में यूक्रेनी प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया, जिससे कीव में असंतोष है। यूरोपीय देशों ने भी इस वार्ता को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं।
सऊदी अरब रूस और यूक्रेन के लिए अनुकूल
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन शांति वार्ता के लिए सऊदी अरब को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यह रूस और अमेरिका दोनों के लिए अनुकूल जगह है। पुतिन से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ही यह विचार रखा था। सऊदी अरब में हो रही वार्ता ट्रंप और पुतिन की मुलाकात का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सउदी अरब के क्राउन प्रिस मोहम्मद बिन सलमान के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बेहद अच्छे संबंध हैं। यही वजह है ट्रंप के प्रस्ताव पर पुतिन ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा की, जो रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यह उनकी युद्ध के बाद की पहली यूएई यात्रा है।
यूएई यात्रा का उद्देश्य:
जेलेंस्की की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता की संभावनाओं पर चर्चा करना है। यूएई को लंबे समय से शांति वार्ता के लिए संभावित स्थल के रूप में देखा जाता रहा है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से ही यहां बड़ी संख्या में रूस और यूक्रेन के प्रवासी आ पहुंचे हैं और अमीरात को पूर्व में मध्यस्थता का अनुभव भी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की सऊदी अरब यात्रा:
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सऊदी अरब के दौरे पर हैं, जहां वे रूसी अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि वह सऊदी अरब में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे।
यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया:
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट किया था कि वह यूक्रेन के बारे में किसी भी ऐसी बातचीत को स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें उनका देश शामिल नहीं हो। यूरोपीय देशों की सरकारों ने भी इसमें भूमिका की मांग की है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति की यूएई यात्रा और अमेरिकी विदेश मंत्री की सऊदी अरब यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां हैं, विशेषकर यूक्रेनी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति और रूस की सैन्य गतिविधियों के कारण। आगे की दिशा इन वार्ताओं के परिणामों पर निर्भर करेगी।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सऊदी अरब में रूसी अधिकारियों के साथ शांति वार्ता कर रहे हैं।