ज्ञानेश कुमार बने नए मुख्य चुनाव आयुक्त: नियुक्ति पर विपक्ष ने उठाए सवाल

Vikash Kumar
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भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner – CEC) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। हाल ही में, ज्ञानेश कुमार को नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पर व्यापक चर्चा हो रही है।

भारत सरकार ने 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) नियुक्त किया है। वह मौजूदा CEC राजीव कुमार का स्थान लेंगे, जो 18 फरवरी 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने यह निर्णय लिया है।

31 जनवरी 2024 को सेवानिवृत्त होने से पहले, ज्ञानेश कुमार ने केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य किया। उन्होंने गृह मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। विशेष रूप से, अनुच्छेद 370 हटाने और राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल थे, ने नए CEC के रूप में ज्ञानेश कुमार के नाम को मंजूरी दी। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी ने प्रस्तावित नामों पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

यह नियुक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत की गई है, जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक नई प्रक्रिया निर्धारित करता है। इस कानून के तहत, चयन पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं, जबकि मुख्य न्यायाधीश (CJI) को इस पैनल से बाहर रखा गया है। विपक्षी दलों ने इस कानून पर आपत्ति जताई है, इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ बताते हुए कमजोर करने का आरोप लगाया है।

नियुक्ति प्रक्रिया

प्रारंभिक प्रक्रिया

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। परंपरागत रूप से, यह नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होती थी। 1989 से पहले, चुनाव आयोग एक सदस्यीय निकाय था, जिसमें केवल मुख्य चुनाव आयुक्त शामिल थे। 1989 में, कांग्रेस सरकार ने दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की, लेकिन बाद में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने इस निर्णय को पलट दिया। 1 अक्टूबर 1993 को, केंद्र सरकार ने फिर से दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की, जिससे चुनाव आयोग तीन सदस्यीय निकाय बन गया।

2023 का विधेयक और वर्तमान प्रक्रिया

2023 में, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की शर्तें) अधिनियम पारित किया गया, जिसने नियुक्ति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए। इस अधिनियम के तहत, नियुक्ति प्रक्रिया में दो समितियाँ शामिल होती हैं:

  1. खोज समिति: कानून मंत्री की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति, जो मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए पांच संभावित नामों की सिफारिश करती है।
  2. चयन समिति: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। यह समिति खोज समिति द्वारा सुझाए गए नामों में से एक को चुनती है और राष्ट्रपति को नियुक्ति के लिए सिफारिश करती है।

इस नए कानून के तहत, मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, जो पहले की प्रक्रिया में शामिल थे।

नियुक्ति और विवाद

17 फरवरी 2025 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त करने का निर्णय लिया। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब इस नियुक्ति में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए थी।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में हालिया बदलावों ने राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है। नए कानून के तहत, चयन प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका समाप्त कर दी गई है, जिससे विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। आगामी समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई प्रक्रिया चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को कैसे प्रभावित करती है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि यह नियुक्ति निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी की ओर इशारा किया है।

नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति महत्वपूर्ण समय पर हुई है, क्योंकि देश आगामी चुनावों की तैयारी कर रहा है। उनकी नियुक्ति पर उठे सवाल और विपक्ष की आपत्तियाँ चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर व्यापक बहस को जन्म दे सकती हैं।

1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, जिससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बहस छिड़ गई है।

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