ग्रेटर नोएडा में फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए हाल ही में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए नए निर्देश चिंता का विषय बन गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, फ्लैट्स की रजिस्ट्री अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय कार्पेट एरिया के आधार पर की जाएगी, जिससे खरीदारों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है।
ग्रेटर नोएडा इस समय दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए हर किसी का हॉट फेवरेट बना हुआ है. लेकिन अब वहां फ्लैट खरीदना कैसे महंगा होने जा रहा है।
यदि आप दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सभी के हॉट फेवरेट बने हुए हैं. लेकिन यदि आपको प्रॉपर्टी खरीदनी है तो तत्काल खरीद लीजिए, क्योंकि जल्द ही आपको इसके लिए अपना बजट बढ़ाना पड़ सकता है. दरअसल ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी (GNIDA) एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जिससे इस इलाके की जमीनों के दाम बढ़ जाएंगे. ग्रेनो अथॉरिटी लगातार दूसरे साल जमीन की कीमत बढ़ाने जा रही है. साल 2025-26 में जमीन की कीमतों को 5 से 8% तक बढ़ाने जा रही है. अपनी जेब में सिटी डेवलपमेंट के लिए पैसा बढ़ाने के लिए की जा रही अथॉरिटी की इस प्लानिंग का सीधा असर फ्लैट से लेकर कॉमर्शियल प्रॉपर्टी तक की कीमतों पर पड़ने जा रहा है. इनके दाम भी पहले के मुकाबले बढ़ जाएंगे. यह प्रस्ताव मार्च में ही होने जा रही ग्रेनो अथॉरिटी की बोर्ड मीटिंग में रखा जाएगा, जहां से इसके पास होते ही अगले वित्तीय वर्ष में जमीनों की कीमत में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो जाएगा।
क्या है सुपर बिल्ट-अप और कार्पेट एरिया में अंतर?
- सुपर बिल्ट-अप एरिया: यह फ्लैट की कुल निर्मित क्षेत्रफल को दर्शाता है, जिसमें कॉमन एरिया जैसे सीढ़ियां, लिफ्ट, लाबी आदि शामिल होते हैं।
- कार्पेट एरिया: यह फ्लैट का वह क्षेत्रफल है जिस पर आप वास्तव में कालीन बिछा सकते हैं, यानी फ्लैट का वास्तविक उपयोगी क्षेत्र।
आम तौर पर, सुपर बिल्ट-अप एरिया कार्पेट एरिया से बड़ा होता है, क्योंकि इसमें कॉमन एरिया भी शामिल होते हैं।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का नया निर्देश:
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि फ्लैट्स की रजिस्ट्री अब कार्पेट एरिया के आधार पर की जाएगी, न कि सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर। इसका मतलब है कि फ्लैट का वास्तविक उपयोगी क्षेत्रफल ही रजिस्ट्री और संबंधित शुल्कों की गणना का आधार होगा।
ग्रेनो अथॉरिटी के अधिकारियों ने कीमत में बदलाव के संकेत दिए हैं. उन्होंने इसका कारण GNIDA के बजट प्लान में होने जा रही 20% बढ़ोतरी को बताया है. इस बढ़ोतरी के बाद ग्रेनो अथॉरिटी का बजट साल 2024-25 के 4,859 करोड़ रुपये के मुकाबले अगले वित्त वर्ष के लिए 5,600 करोड़ रुपये का हो जाएगा. बजट बढ़ाने की जरूरत जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मेट्रो ट्रेन नेटवर्क विस्तार जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण पड़ी है. इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए ही ग्रेनो अथॉरिटी को 170 करोड़ रुपये की जरूरत है. इस कारण ही जमीन की कीमतों में बदलाव किया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा में इंडस्ट्रियल जमीन की कीमत फिलहाल 9,920 रुपये से 30,788 रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच है. इसके उलट रिहायशी प्लॉट की कीमत 31,877 रुपये से 47,227 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से बिक रहे हैं. हालांकि इनका मार्केट प्राइस इससे भी कहीं ज्यादा है. ग्रेटर नोएडा में 2 FAR वाले कॉमर्शियल प्लॉट की कीमत सबसे ज्यादा 57,176 रुपये से 66,602 रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच है।
इस बदलाव से खरीदारों पर प्रभाव:
सुपर बिल्ट-अप एरिया के मुकाबले कार्पेट एरिया कम होता है, जिससे फ्लैट की कीमत और उस पर आधारित शुल्क भी कम होते हैं। इस परिवर्तन से खरीदारों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:
- कम रजिस्ट्री शुल्क: चूंकि शुल्क कार्पेट एरिया के आधार पर होंगे, इसलिए खरीदारों को कम शुल्क देना होगा।
- स्पष्ट मूल्यांकन: कार्पेट एरिया के आधार पर मूल्यांकन से फ्लैट की वास्तविक मूल्य का सही अनुमान लगाया जा सकेगा।
निर्माताओं और बिल्डरों के लिए निर्देश:
निर्माताओं और बिल्डरों को निर्देश दिया गया है कि वे फ्लैट्स की बिक्री और रजिस्ट्री के समय कार्पेट एरिया को ही मान्यता दें। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी लेन-देन पारदर्शी और मानक प्रक्रिया के अनुसार हों।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का यह कदम खरीदारों के हित में प्रतीत होता है, क्योंकि इससे उन्हें अधिक पारदर्शिता और संभावित रूप से कम शुल्क का लाभ मिलेगा। फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे व्यक्तियों को इस बदलाव के बारे में अवगत होना चाहिए और अपनी वित्तीय योजना समायोजित करनी चाहिए।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के नए निर्देशों के अनुसार, फ्लैट्स की रजिस्ट्री अब कार्पेट एरिया के आधार पर होगी, जिससे खरीदारों को कम शुल्क और अधिक पारदर्शिता का लाभ मिलेगा।