परिचय: छत्रपति संभाजी महाराज की वीरता पर आधारित फिल्म
विक्की कौशल स्टारर छावा (Chhaava) एक ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा है, जो मराठा योद्धा और छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज की वीरता, संघर्ष और बलिदान की कहानी दिखाने का प्रयास करता है। यह फिल्म शिवाजी सावंत के प्रसिद्ध मराठी उपन्यास ‘छावा’ पर आधारित है और इसे भव्य रूप से प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म का उद्देश्य संभाजी महाराज के जीवन के संघर्ष, उनके शासनकाल, मुगलों के साथ उनके युद्ध और अंततः उनके बलिदान को दर्शाना है। हालांकि, निर्देशन और स्क्रीनप्ले की कमजोरियों के कारण यह फिल्म ऐतिहासिक गहराई तक नहीं पहुंच पाती और एक शोरगुल भरे एक्शन ड्रामा के रूप में रह जाती है।
कहानी: इतिहास का तेज-रफ्तार पाठ
फिल्म की शुरुआत में ही अजय देवगन की आवाज में नैरेशन होता है, जिसमें छत्रपति संभाजी महाराज के इतिहास को संक्षेप में बताया जाता है। लेकिन यह प्रस्तुति इतनी तेज-रफ्तार है कि किरदारों को विकसित होने का मौका ही नहीं मिलता।

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से संभाजी महाराज के शासनकाल, उनके युद्धों और मुगल शासक औरंगज़ेब से उनके संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। यह फिल्म उनके बचपन से लेकर उनके बलिदान तक की यात्रा को दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन इसके लिए जो गहराई और संतुलन चाहिए था, वह नहीं मिल पाता।
फिल्म में दिखाए गए प्रमुख घटनाक्रम:
- संभाजी महाराज की वीरता और युद्ध कौशल
- मुगल साम्राज्य और मराठों के बीच संघर्ष
- संभाजी की गिरफ्तारी और औरंगज़ेब के खिलाफ उनकी आखिरी लड़ाई
लेकिन इन सभी घटनाओं को डायलॉग्स के माध्यम से ज्यादा बताया गया है, दिखाया कम गया है। युद्ध के कई दृश्य स्क्रीन पर नहीं दिखाए जाते, बल्कि पात्रों के संवादों के जरिए उनके प्रभाव को समझाने की कोशिश की जाती है।
अभिनय और किरदार: विक्की कौशल दमदार, लेकिन स्क्रिप्ट कमजोर
1. विक्की कौशल (संभाजी महाराज के रूप में)
विक्की कौशल ने संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है और उनके एक्शन दृश्यों में दमखम नजर आता है। उनके बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीक्वेंस प्रभावशाली हैं, लेकिन संवाद और पटकथा की कमजोरी के कारण उनका किरदार पूरी तरह उभर नहीं पाता।
संभाजी के किरदार को इतनी अतिशयोक्ति के साथ पेश किया गया है कि यह एक ऐतिहासिक चरित्र से ज्यादा सुपरहीरो जैसा लगने लगता है।
संभाजी की एंट्री के वक्त बैकग्राउंड में बजता है:
“आया है संभाजी!”
एक दृश्य में, जब उन्हें कैद किया जाता है और सैकड़ों सैनिकों से लड़ाई करते हैं, तो एक दरबारी कहता है—
“यह राजा जंगल के राजा से भी ज्यादा खतरनाक है!”
2. अक्षय खन्ना (औरंगज़ेब के रूप में)
अक्षय खन्ना ने मुगल शासक औरंगज़ेब की भूमिका निभाई है और यह फिल्म का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन है। वह अपने दमदार अभिनय से छाप छोड़ते हैं और हर सीन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
3. दिव्या दत्ता (महारानी के रूप में)
दिव्या दत्ता का किरदार भावनात्मक और गंभीर है। वह एक मजबूत, लेकिन दुखद मां के रूप में उभरती हैं, जो अपने पुत्र के बलिदान को देखती हैं।
कमजोरियां और निष्कर्ष
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसका अतिशयोक्तिपूर्ण संवाद और संवाद-प्रधान कहानी है। युद्ध और घटनाएं ऑन-स्क्रीन दिखाने के बजाय सिर्फ संवादों के जरिए समझाई जाती हैं।
संभाजी महाराज के वीरता को दिखाने के लिए फिल्म में कई जगह अनावश्यक नाटकीयता डाली गई है। उदाहरण के लिए, जब वह कैद में होते हैं और सैकड़ों सैनिकों से अकेले लड़ते हैं, तो एक दरबारी कहता है—
“यह राजा जंगल के राजा से भी ज्यादा खतरनाक है!”
अगर फिल्म में कहानी को अधिक गहराई और संतुलन के साथ पेश किया जाता, तो यह एक यादगार ऐतिहासिक फिल्म बन सकती थी।
रेटिंग: ⭐⭐⭐☆☆ (3/5)
क्या देखें?
अगर आप विक्की कौशल के फैन हैं और भव्य सिनेमैटोग्राफी का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं। लेकिन अगर आप गहरी और संतुलित ऐतिहासिक कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।