बीजेपी को अगले महीने मिलेगा नया अध्यक्ष: रेस में तीन दिग्गज, चुनाव प्रक्रिया और राजनीति बदलने वाले अध्यक्षों के किस्से

Vikash Kumar
Vikash Kumar
Vikash Kumar is an Expert of Indian Politics, Sports & Stock Market with News Rival

Published:

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल के अंतिम दिन नज़दीक आ रहे हैं। अगले महीने पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है, जिससे संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। इस लेख में हम संभावित उम्मीदवारों, चुनाव प्रक्रिया और राजनीति में अध्यक्षों के प्रभाव पर चर्चा करेंगे।

मुख्य बिंदु:

  • संभावित उम्मीदवार: सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रमुख उम्मीदवारों के रूप में उभर रहे हैं। इनमें से किसी एक को पार्टी अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
  • चुनाव प्रक्रिया: बीजेपी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी कराया जा सकता है जब देश के कम से कम आधे राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव हो जाएं। इसलिए, प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पहले पूरी की जाएगी, उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा।
  • दक्षिण भारत से अध्यक्ष: पार्टी का फोकस दक्षिणी राज्यों पर है, और 20 वर्षों से दक्षिण भारत से कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बना है। इसलिए, इस बार दक्षिण भारत से किसी नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार हो सकता है।
  • अध्यक्षों के प्रभाव: पार्टी अध्यक्ष का चुनाव संगठनात्मक रणनीति, चुनावी सफलता और पार्टी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में पार्टी ने महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव देखे।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठन

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भारत की प्रमुख राजनीतिक शक्तियों में से एक है। इसकी स्थापना और विकास की यात्रा कई महत्वपूर्ण घटनाओं और संघर्षों से भरी हुई है।

स्थापना और प्रारंभिक संघर्ष:

बीजेपी का गठन 6 अप्रैल, 1980 को हुआ था, जब अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी का पहला अध्यक्ष चुना गया। इससे पहले, 21 अक्टूबर, 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जो बीजेपी का पूर्ववर्ती संगठन था। जनसंघ के विचारधारा और संगठनात्मक ढांचे को ध्यान में रखते हुए, बीजेपी का गठन किया गया।

उत्थान:

बीजेपी ने अपने गठन के बाद से कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए। 1996 में पार्टी ने पहली बार केंद्र में सरकार बनाई, हालांकि यह सरकार अल्पमत में थी और केवल 13 दिन ही चल पाई। 1998 में पार्टी ने 182 सीटों पर जीत दर्ज की और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनी। 2004 में पार्टी को 138 सीटें मिलीं, लेकिन सरकार बनाने में असमर्थ रही। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई, जो आज भी सत्ता में है।

बीजेपी के इतिहास में कोई विशेष अवसान की घटना नहीं रही है। हालांकि, 2004 के आम चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे पार्टी को सत्ता से बाहर रहना पड़ा। लेकिन, पार्टी ने इस समय को संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक पुनर्निर्माण में लगाया, जिससे 2014 में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई।

बीजेपी अध्यक्षों का इतिहास: नेतृत्व की यात्रा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का इतिहास उसके अध्यक्षों के नेतृत्व में आकार लिया है। पार्टी की स्थापना 1980 में हुई, और तब से लेकर अब तक कई नेताओं ने इसकी कमान संभाली है।

1. अटल बिहारी वाजपेयी (1980-1986):

पार्टी की स्थापना के समय अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

2. लाल कृष्ण आडवाणी (1986-1991):

वाजपेयी जी के बाद, लाल कृष्ण आडवाणी अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को गति दी, जिससे पार्टी की लोकप्रियता में वृद्धि हुई।

3. मुरली मनोहर जोशी (1991-1993):

आडवाणी जी के बाद, मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में पार्टी ने शिक्षा और संस्कृति के मुद्दों पर जोर दिया।

4. अटल बिहारी वाजपेयी (1993-1996):

जोशी जी के बाद, वाजपेयी जी ने फिर से अध्यक्ष का पद संभाला। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 1996 के आम चुनावों में भाग लिया।

5. लाल कृष्ण आडवाणी (1996-2004):

वाजपेयी जी के बाद, आडवाणी जी ने फिर से अध्यक्ष का पद संभाला। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 1998 और 1999 के आम चुनावों में सफलता प्राप्त की।

6. नितिन गडकरी (2009-2013):

आडवाणी जी के बाद, नितिन गडकरी अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया।

7. राजनाथ सिंह (2013-2014):

गडकरी जी के बाद, राजनाथ सिंह अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2014 के आम चुनावों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की।

8. अमित शाह (2014-2019):

राजनाथ सिंह के बाद, अमित शाह अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2019 के आम चुनावों में भी शानदार जीत दर्ज की।

9. जगत प्रकाश नड्डा (2019-वर्तमान):

अमित शाह के बाद, जगत प्रकाश नड्डा वर्तमान में पार्टी अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी संगठनात्मक मजबूती और चुनावी सफलता पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का चुनावी प्रक्रिया: एक विस्तृत विश्लेषण

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भारत की प्रमुख राजनीतिक शक्तियों में से एक है। पार्टी की चुनावी प्रक्रिया उसकी संगठनात्मक संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब है।

पार्टी अध्यक्ष का चुनाव:

बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी कराया जा सकता है जब देश के कम से कम आधे राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव हो जाएं। इस प्रक्रिया में पार्टी के सक्रिय सदस्य अपने-अपने मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर चुनावों में भाग लेते हैं। राष्ट्रीय कार्यसमिति द्वारा चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने के बाद, सक्रिय सदस्य अपने-अपने क्षेत्र में मतदान करते हैं। पार्टी में अब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध होता आया है, यानी सिर्फ एक ही व्यक्ति नामांकन करता है और बिना वोटिंग अध्यक्ष चुन लिया जाता है। हालांकि, 2013 में जब नितिन गडकरी को दोबारा अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब यशवंत सिन्हा ने नामांकन पर्चा लिया था। लेकिन जब गडकरी ने अनिच्छा दिखाई, तब सिन्हा ने पर्चा वापस लिया था और राजनाथ सिंह को अध्यक्ष चुना गया था।

प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव:

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले, पार्टी प्रदेश स्तर पर अध्यक्षों का चुनाव करती है। यह चुनाव मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर आयोजित होते हैं। प्रदेश अध्यक्षों का चयन पार्टी की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होता है।

चुनाव प्रबंधन:

बीजेपी का चुनाव प्रबंधन एक सुव्यवस्थित और रणनीतिक प्रक्रिया है। पार्टी चुनावों के दौरान विभिन्न समितियों का गठन करती है, जो चुनावी रणनीति, प्रचार-प्रसार, उम्मीदवार चयन और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालती हैं। पार्टी के चुनाव प्रबंधन विभाग के प्रमुख श्री भूपेंद्र यादव हैं, जो चुनावी गतिविधियों की निगरानी और संचालन करते हैं।

हाल ही में, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2024 में समाप्त हुआ था। पार्टी ने जून 2024 में उनके कार्यकाल को 6 महीने का विस्तार दिया था। अब, पार्टी ने मार्च 2025 के पहले हफ्ते तक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इस बार, दक्षिण भारत से किसी नेता के नाम पर सहमति बनने की संभावना है, क्योंकि पार्टी का फोकस अब दक्षिणी राज्यों पर है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी कराया जा सकता है जब देश के कम से कम आधे राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव हो जाएं। फरवरी के अंत तक 18 राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया पूरी होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा।

Related articles

Recent articles

Language Switcher