Bihar : बिहार में भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सर्वेक्षण की समयसीमा को एक वर्ष बढ़ाकर जुलाई 2026 तक कर दिया है, जिससे जमीन मालिकों को आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करने के लिए अधिक समय मिल सके।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में भूमि विवादों को कम करना, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान करना, और भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन करना है। सर्वेक्षण के दौरान, जमीन की सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा और विवादों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
लोगों को भूमि सर्वेक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न जिलों में जागरूकता रथों की शुरुआत की गई है। मुजफ्फरपुर जिले में, आठ जागरूकता रथों को विभिन्न पंचायतों में भेजा गया है, जो जमीन मालिकों को सर्वेक्षण से संबंधित जानकारी प्रदान करेंगे।
सर्वेक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने जमाबंदी रिकॉर्ड को आधार से जोड़ने की योजना बनाई है। इससे बेनामी संपत्तियों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और भूमि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, अब तक 76 लाख से अधिक रैयतों ने स्वघोषणा पत्र जमा किए हैं, जिसमें से 46 लाख ऑनलाइन माध्यम से और 24 लाख ने शिविरों में जाकर अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत किए हैं। सर्वर से संबंधित कुछ समस्याओं के कारण 6 लाख स्वघोषणा पत्रों को अभी तक ऑनलाइन नहीं किया जा सका है, लेकिन विभाग इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।
सरकार की यह पहल राज्य में भूमि से जुड़े विवादों को कम करने और भूमि रिकॉर्ड को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लोगों से अपील की गई है कि वे समय पर अपने दस्तावेज़ तैयार करें और सर्वेक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
अब 15 मार्च तक स्वघोषणा पत्र जमा कर सकेंगे
राज्य के रैयतों को अपनी जमीन से संबंधित जानकारी देने के लिए मार्च 2025 तक का समय दिया गया है। अब रैयत 15 मार्च तक अपना स्वघोषणा पत्र जमा कर सकेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से की जा सकेगी, ताकि लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।
इस संबंध में राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने एक स्पष्ट समय सीमा निर्धारित कर दी है। इसके साथ ही अब शहरी क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण की प्रक्रिया का विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है।
अब तक लगभग 60 हजार रैयतों ने अपनी भूमि का स्वघोषणा पत्र दिया
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 60 हजार रैयतों ने अपनी भूमि का स्वघोषणा पत्र दे दिया है। जिसमें आनलाइन करीब 19 हजार 119 तथा आफलाइन 39 हजार 736 स्वघोषणा पत्र शामिल है।
इस प्रक्रिया के अगले चरण में पुराने खतियान (तेरीज लेखन) को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से तैयार करने का काम भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि भूमि से जुड़े सभी रिकार्ड्स को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाए, जिससे भविष्य में भूमि विवादों को रोका जा सके।
बिहार सरकार ने भूमि सर्वेक्षण की समयसीमा बढ़ाकर जुलाई 2026 कर दी है। सर्वेक्षण के माध्यम से भूमि विवादों को कम करने और रिकॉर्ड को अद्यतन करने का प्रयास किया जा रहा है।