मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले भगदड़, 30 की मौत, 60 घायल

Mayank Singh
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Team - News Rival

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प्रयागराज: बुधवार सुबह मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले महा कुंभ में दर्दनाक हादसा हुआ। संगम क्षेत्र में अचानक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ मच गई, जिसमें 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए।

योगी आदित्यनाथ ने की अपील, कहा – निकटतम घाट पर करें स्नान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन भीड़ का दबाव बना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे संगम नोज पर जाने के बजाय नजदीकी घाटों पर स्नान करें। साथ ही, उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी।

महाकुंभ में उमड़ी 10 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष एक दिन में 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाया था और अमृत स्नान के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की थी। इसके बावजूद, भारी भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के चलते यह हादसा हुआ।

महाकुंभ हेल्पलाइन नंबर:
महाकुंभ हेल्पलाइन: 1920
मेले की पुलिस हेल्पलाइन: 1944

घटनास्थल पर बिखरी चप्पलें, कपड़े – चश्मदीदों ने सुनाई आपबीती
घटनास्थल पर चप्पलें, कपड़े और अन्य सामान बिखरे पड़े थे, जो हादसे की भयावहता को बयां कर रहे थे। एक श्रद्धालु मधुमिता ने बताया कि “रात 12 बजे के बाद अचानक भीड़ बढ़ने लगी, जिससे बैरिकेड टूट गए और कई लोग कुचल गए।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला” बताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे प्रशासनिक “कुप्रबंधन” करार दिया और VIP कल्चर पर रोक लगाने की मांग की। AAP नेता संजय सिंह ने कहा कि “रोड्स VIP मूवमेंट के कारण बंद की जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।”

गौतम अडानी ने जताया शोक, मदद का दिया आश्वासन

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हम दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं।”

“अडानी ग्रुप मेले प्रशासन और राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगा,” उन्होंने आगे कहा।

निष्कर्ष:
महा कुंभ 2025 में हुए इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति अपनाने की जरूरत है।

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