एआई शिखर सम्मेलन 2025: प्रधानमंत्री मोदी का उद्घाटन भाषण, तकनीकी उन्नति से लेकर सामाजिक प्रभाव तक की चर्चा”

Vikash Kumar
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प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस में एआई शिखर सम्मेलन में संबोधन: भारत की भूमिका और दृष्टिकोण

पेरिस में आयोजित ‘एआई एक्शन समिट’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सह-अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में लगभग 100 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के वैश्विक विकास और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित ‘एआई एक्शन समिट’ में भाग लिया, जहां उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वैश्विक भूमिका और भारत की दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में आयोजित ‘एआई एक्शन समिट’ में भारत की ओर से अगले एआई शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की घोषणा की। उन्होंने कहा, “भारत अगले एआई शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करके खुश होगा।”

इस समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संचालन और मानकों के वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “एआई हमारी अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समाज को नया आकार दे रहा है और मानवता के लिए कोड लिख रहा है।”

मुख्य विषय:

सम्मेलन में पांच मुख्य विषयों पर चर्चा की गई:

  1. सार्वजनिक हित: एआई के विकास में सार्वजनिक हित की रक्षा।
  2. नौकरी पर प्रभाव: एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव।
  3. निवेश रणनीतियाँ: एआई में निवेश की रणनीतियाँ।
  4. नैतिक विचार: एआई के नैतिक पहलुओं पर विचार।
  5. नियामक ढाँचे: एआई के लिए नियामक ढाँचे का निर्माण।

भारत की एआई रणनीति:

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की एआई रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत ने ‘IndiaAI Mission’ की शुरुआत की है, जिसका बजट लगभग 10,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस मिशन के तहत, 2025 में 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे भारत को एआई क्षेत्र में अग्रणी बनाने का लक्ष्य है।

वैश्विक सहयोग की आवश्यकता:

प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर एआई के मानकों और नीतियों के निर्धारण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के लिए एक समग्र प्रणाली और मानकों की आवश्यकता है, ताकि साझा मूल्यों को बनाए रखा जा सके और इससे जुड़े खतरों से निपटा जा सके।

नौकरियों पर प्रभाव:

एआई के कारण नौकरियों पर संभावित प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इतिहास गवाह है, किसी भी नई तकनीक के आगमन से काम खत्म नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदल जाता है। नए प्रकार के रोजगार सृजित होते हैं, और हमें अपने लोगों को स्किल्ड बनाने और इस पर निवेश करने की आवश्यकता है।

लाभ:

  1. वैश्विक सहयोग: इस सम्मेलन ने देशों को एआई के नैतिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया, जिससे वैश्विक स्तर पर साझा मानकों और नीतियों का निर्माण संभव हुआ।
  2. नवाचार को बढ़ावा: प्रतिभागियों ने एआई के विभिन्न अनुप्रयोगों पर चर्चा की, जिससे नवाचार को प्रोत्साहन मिला और नई तकनीकों के विकास की दिशा स्पष्ट हुई।
  3. नीति निर्धारण: सम्मेलन ने देशों को एआई नीति निर्धारण में मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे तकनीकी विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

हानियाँ:

  1. नौकरियों पर प्रभाव: एआई के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियों का खतरा बढ़ सकता है, जिससे बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  2. सुरक्षा चिंताएँ: एआई तकनीकों के दुरुपयोग से साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से संबंधित समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  3. सामाजिक असमानता: एआई के लाभों का असमान वितरण सामाजिक असमानता को बढ़ावा दे सकता है, जिससे डिजिटल खाई और गहरी हो सकती है।

कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का समर्थन: किसानों की सहायता के लिए रणनीतियाँ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने, संसाधनों के कुशल उपयोग, और उत्पादन में वृद्धि में सहायता मिल रही है। भारत में, एआई तकनीकों का उपयोग किसानों की सहायता के लिए विभिन्न तरीकों से किया जा रहा है।

1. सटीक कृषि (Precision Agriculture):

एआई आधारित सटीक कृषि तकनीकों के माध्यम से, किसानों को फसल की स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। इससे वे सिंचाई, उर्वरक उपयोग, और कीट नियंत्रण के निर्णय अधिक सटीकता से ले सकते हैं।

2. फसल स्वास्थ्य निगरानी:

एआई संचालित ड्रोन और सेंसर्स का उपयोग करके, फसलों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी की जाती है। यह तकनीक कीटों, रोगों, और पोषक तत्वों की कमी का समय पर पता लगाने में मदद करती है, जिससे त्वरित उपचार संभव होता है।

3. जलवायु पूर्वानुमान और मौसम सलाह:

एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान किसानों को सटीक जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे वे बुवाई, सिंचाई, और कटाई के लिए उपयुक्त समय का चयन कर सकते हैं। यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक है।

4. कृषि आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन:

एआई तकनीकों का उपयोग करके, कृषि उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाया जाता है। स्मार्ट एल्गोरिदम बाजार की मांग और आपूर्ति का विश्लेषण कर किसानों को उपयुक्त समय पर अपनी फसल बेचने की सलाह देते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिलता है और बिचौलियों की भूमिका कम होती है।

5. कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण:

किसानों को एआई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कृषि विभाग द्वारा विकसित एआई-संचालित चैटबॉट्स, जैसे ‘किसान ई-मित्र’, किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

6. सतत कृषि प्रथाएँ:

एआई तकनीक सतत कृषि को बढ़ावा दे रही है। यह संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रही है। उदाहरण के लिए, सटीक सिंचाई, लक्षित उर्वरक उपयोग, और कीट प्रबंधन में कम रसायन उपयोग के माध्यम से सतत कृषि प्रथाओं को अपनाया जा रहा है।

निष्कर्ष:

एआई तकनीकों का कृषि में समावेश किसानों को सशक्त बना रहा है, जिससे वे बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं, संसाधनों का कुशल उपयोग कर रहे हैं, और उत्पादन में वृद्धि कर रहे हैं। सरकारों और निजी संस्थाओं को मिलकर किसानों को एआई आधारित समाधान उपलब्ध कराने और उन्हें इसके उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने की दिशा में काम करना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन भारत की एआई क्षेत्र में अग्रणी बनने की प्रतिबद्धता और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता को स्पष्ट करता है। उनकी दृष्टि से, एआई न केवल तकनीकी विकास का माध्यम है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

पेरिस एआई शिखर सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर एआई के विकास और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, इसके साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी सामने आईं, जिन्हें संबोधित करना आवश्यक है। इस सम्मेलन ने देशों को एक मंच पर लाकर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान किया, जिससे एआई के लाभों का अधिकतम उपयोग और हानियों का न्यूनतमकरण संभव हो सके।

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