इम्युनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्डर गिलियन बैरे सिंड्रोम का प्रकोप सबसे ज्यादा पुणे में देखा जा रहा है, जहां संक्रमितों का आंकड़ा रविवार को 100 के पार पहुंच गया। पुणे में जीबीएस संक्रमितों की संख्या 101 हो गई है, जिनमें से 68 पुरुष और 33 महिलाएं शामिल हैं।
महाराष्ट्र के पुणे में दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी से हड़कंप मच गया है। पुणे और उसके आसपास के शहरों में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मामलों की संख्या 100 के आंकड़े को पार कर गई है। सोलापुर में तो एक संदिग्ध की इसके कारण मौत हो गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के सोलापुर में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके तंत्रिका संबंधी विकार ‘गुइलेन-बैरे सिंड्रोम’ से पीड़ित होने का संदेह था। पीड़ित पुणे में संक्रमण हुआ और बाद में वह सोलापुर पहुंचा।सोलापुर मामले के अलावा, महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने पुणे, पिंपरी चिंचवाड़, पुणे ग्रामीण और कुछ पड़ोसी जिलों में जीबीएस के संदिग्ध 18 अन्य लोगों की भी पहचान की है। विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे 101 मरीजों में से 16 वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इनमें 68 पुरुष और 33 महिलाएं हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि 101 मरीजों में से 19 मरीज 9 वर्ष से कम उम्र के हैं, 15 मरीज 10-19 आयु वर्ग के हैं, 20 मरीज 20-29 आयु वर्ग के हैं, 13 मरीज 30-39 आयु वर्ग के हैं, 12 मरीज 40-49 आयु वर्ग के हैं, 13 मरीज 50-59 आयु वर्ग के हैं, 8 मरीज 60-69 आयु वर्ग के हैं, और एक 70-80 आयु वर्ग का है।इनमें से 81 मरीज पुणे नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से, 14 पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से और शेष 6 अन्य जिलों से हैं।
पुणे में सबसे ज्यादा मरीज
इम्युनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्डर गिलियन बैरे सिंड्रोम का प्रकोप सबसे ज्यादा पुणे में देखा जा रहा है, जहां संक्रमितों का आंकड़ा रविवार को 100 के पार पहुंच गया। पुणे में जीबीएस संक्रमितों की संख्या 101 हो गई है, जिनमें से 68 पुरुष और 33 महिलाएं शामिल हैं। इनमें 16 मरीजों की हालत गंभीर है और वे वेंटीलेटर सपोर्ट पर हैं। रैपिड रेस्पॉन्स टीम और पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का स्वास्थ्य विभाग लगातार सर्विलांस कर रहे हैं। खासकर पुणे के सिंघाद रोड पर विशेष निगरानी की जा रही है क्योंकि वहीं पर सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। अभी तक राज्य के 25,578 घरों का सर्वे किया जा चुका है। इनमें से 15,761 घर पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के और 3,719 घर चिंचवाड़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आते हैं। 6,098 घर ग्रामीण इलाके के हैं।
क्या है जीबीएस
गिलियन बैरे सिंड्रोम या जीबीएस एक इम्युनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्डर है। इस बीमारी में अचानक से हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी के लक्षणों में कमजोरी, डायरिया आदि शामिल हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण के चलते जीबीएस की समस्या हो रही है। इससे मरीज की इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। बच्चे और युवा इस बीमारी से ज्यादा ग्रस्त हो रहे हैं। हालांकि अच्छी बात ये है कि इलाज के बाद मरीज ठीक हो रहे हैं। सरकार ने लोगों से पीने का पानी साफ रखने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। साथ ही लोगों को अपने खाने में साफ-सफाई रखने और सब्जियों को अच्छी तरह से उबालकर खाने की सलाह जारी की है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
स्वास्थ्य विभाग को 9 जनवरी को पुणे के अस्पताल में भर्ती एक मरीज पर इस क्लस्टर के अंदर पहला जीबीएस मामला होने का संदेह है। परीक्षणों से अस्पताल में भर्ती मरीजों से लिए गए कुछ नमूनों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया का पता चला है। इससे पहले शनिवार को प्रशासन द्वारा जारी किए गए परीक्षण के नतीजों से पता चला था कि पुणे में पानी के मुख्य सोत्र खडकवासला बांध के पास एक कुएं में बैक्टीरिया ई कोली का हाई-लेवल है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि कुएं का उपयोग किया जा रहा था या नहीं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबाल लें और खाने से पहले उसे गर्म कर लें।
मरीजों का होगा मुफ्त में इलाज- अजित पवार
पुणे में बढ़ रहे गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के बढ़ते मामलों को लेकर डिप्टी सीएम अजित पवार ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा कि बीमारी से पीड़ित मरीजों का अब मुफ्त इलाज होगा। मरीजों को दवाएं मुहैया कराने के लिए भी सरकार ने फैसला लिया।