भारत के ‘चिकन नेक’ के नजदीक पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का गुप्त दौरा भारत की चिंताएं बढ़ाने वाला है। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली कट्टरपंथियों की कठपुतली सरकार ने आईएसआई चीफ का रंगपुर दौरा कराया है। जिस देश की आजादी में भारत का सबसे बड़ा योगदान है, वही देश अब अहसानफरामोशी पर उतर आया है।
नई दिल्ली : भारत का ‘चिकन नेक’ एक बार फिर चर्चा में है। वही ‘चिकन नेक’ जिसके बारे में अब जेल में बंद शरजील इमाम ने अपने एक बहुचर्चित और भड़काऊ भाषण में वहां रेलवे ट्रैक और सड़कों को मलबे से पाटकर नॉर्थ ईस्ट को भारत से काटने की बात कही थी। लेकिन रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण ये संकरी भूमि पट्टी इस बार चर्चा में है पड़ोसी देश बांग्लादेश की चालबाजियों की वजह से। भारत के शौर्य से जिस देश का दुनिया के नक्शे पर उदय हुआ, वही देश अब उसके अहसानों को भूलकर ‘चिकन नेक’ के करीब तक पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को पहुंच दे रहा है।
बांग्लादेश में जबसे मोहम्मद यूनुस की अगुआई में कट्टरपंथियों की कठपुतली सरकार सत्ता में आई है, तब से ही वह भारत से दुश्मनों की तरह बर्ताव कर रहा है। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद कट्टरपंथियों की भीड़ ने चुन-चुनकर हिंदू और दूसरे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया। यूनुस की अंतरिम सरकार आंख मूंदे रही। अंतरिम सरकार में शामिल नेता भारत के खिलाफ जबतब जहर उगलते रहे। गीदड़भभकी देते रहे। यहां तक कि भारत के ‘विजय दिवस’ मनाने को लेकर भी अनर्गल प्रलाप किए। लेकिन अब तो बांग्लादेश की सरकार ने हद ही कर दिया है। भारत के ‘चिकन नेक’ तक पाकिस्तानी सेना और उसकी कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई को पहुंच दिया है।
यूनुस ने बांग्लादेश को पाकिस्तान की गोद में बैठा दिया!
कुछ न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के 4 बड़े अफसरों ने इसी हफ्ते बांग्लादेश के रंगपुर जिले का गुप्त दौरा किया है। रंगपुर भारत के चिकन नेक के काफी करीब है। सत्ता में आते ही यूनुस सरकार पाकिस्तान के आगे बिछी सी लगती है। पहली बार बांग्लादेश की सेना के किसी शीर्ष अफसर ने पाकिस्तान का दौरा किया। बांग्लादेश आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कमरुल हसन ने पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल असीम मुनरो से इस्लामाबाद में मुलाकात की। उस दौरे के बाद आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक ने भी इसी हफ्ते बांग्लादेश का दौरा किया। पहली बार किसी आईएसआई चीफ ने बांग्लादेश का दौरा किया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग नेटवर्क को बनाना है। ये खबर भारत को सतर्क करने वाली है क्योंकि आईएसआई अब चिकन नेक के पास भारत में गड़बड़ी फैलाने की नापाक साजिश रचने की कोशिश कर सकती है।
क्या है ‘चिकन नेक’?
दरअसल सिलिगुड़ी को भारत का ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। ये नाम उसके आकार के मद्देनजर मिला है जो किसी मुर्गी की गर्दन की तरह दिखता है। ‘चिकन नेक’ अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से रणनीतिक और भू-राजनैतिक तौर पर बहुत ज्यादा महत्व रखता है। वैसे है तो ये जमीन की एक संकरी पट्टी ही, लेकिन यही नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चोड़ाई करीब 22 किलोमीटर है। कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई महज 17 किलोमीटर है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर तीन देशों से घिरा हुआ है। ये देश हैं- नेपाल, भूटान और बांग्लादेश। ये न सिर्फ नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है बल्कि चीन से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के संवेदनशील जोन तक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट के लिहाज से भी बहुत अहम है। साफ है कि पूर्वोत्तर के सीमाई इलाकों में चीन की किसी भी हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भी ये कॉरिडोर बहुत अहमियत रखता है।
भारत का अहसान भूल रही बांग्लादेश की कट्टरपंथियों की कठपुतली सरकार
भारत के शौर्य और पराक्रम की बदौलत ही बांग्लादेश का जन्म हुआ। 1947 में देश के बंटवारे के वक्त आज का बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था। लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान उसके साथ सौतेला व्यवहार करता था। कुछ-कुछ ऐसा जैसे वह उसका हिस्सा न होकर कोई उपनिवेश हो जहां के संसाधनों को वो लूट रहा हो। पूर्वी पाकिस्तान में भी मुस्लिम आबादी ही बहुसंख्यक थी लेकिन वह उर्दू नहीं, बंगाली बोलती थी। पाकिस्तान को लगता था कि ये बंगाली बोलने वाले सिर्फ नाम के मुसलमान हैं, दिल से हिंदू हैं। इसलिए वहां की सेना ने अपने ही नागरिकों का दमन करना शुरू कर दिया।