हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने गूगल पर अपनी खोज और विज्ञापन बाजार में अवैध एकाधिकार बनाए रखने का आरोप लगाया है। इसके परिणामस्वरूप, DOJ ने एक न्यायाधीश से गूगल की मूल कंपनी, अल्फाबेट, को उसका क्रोम ब्राउज़र बेचने का आदेश देने का अनुरोध किया है।
गूगल पर इंटरनेट वर्ल्ड और सर्च इंजन के अपने दबदबे को बनाए रखने के लिए कई अनुचित तरीके अपनाने के आरोप हैं। इन्हीं आरोपों के चलते अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से कंपनी के दबदबे को कम करने को लेकर कुछ मांग की हैं। इनके मुताबिक गूगल को अपनी सर्च इंजन कंपनी क्रोम को बेचना होगा। हालांकि गूगल ने इसका विरोध किया है।
DOJ की मांग और उसके संभावित प्रभाव:
DOJ का मानना है कि क्रोम ब्राउज़र के माध्यम से गूगल अपने खोज इंजन को अनुचित लाभ पहुंचा रहा है, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। यदि गूगल को क्रोम बेचने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उसके विज्ञापन मॉडल में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जिससे अन्य कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है।
क्रोम की संभावित बिक्री और उसका मूल्यांकन:
क्रोम ब्राउज़र, जो वर्तमान में दुनिया का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला वेब ब्राउज़र है, की अनुमानित कीमत $20 बिलियन आंकी गई है। यदि इसे बेचा जाता है, तो यह सर्च इंजन बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है।
गूगल की प्रतिक्रिया और आगे की प्रक्रिया:
गूगल ने DOJ की इस कार्रवाई की आलोचना की है और कहा है कि ये उपाय उपभोक्ताओं और तकनीकी नेतृत्व को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कंपनी इस निर्णय के खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है, जिससे कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक चल सकती है।
गूगल ने DOJ के इस प्रस्ताव का विरोध किया है, यह तर्क देते हुए कि इस तरह का विभाजन उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा सकता है और तकनीकी नवाचार में बाधा उत्पन्न कर सकता है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह इस निर्णय के खिलाफ कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रही है।
इंटरनेट उद्योग पर संभावित प्रभाव:
यदि गूगल को क्रोम ब्राउज़र बेचने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह इंटरनेट उद्योग में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत हो सकता है। यह कदम गूगल के खिलाफ चल रहे व्यापक एंटी-ट्रस्ट मामलों का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कंपनी की व्यापार प्रथाओं को लेकर जांच की जा रही है।

उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव:
यदि क्रोम को किसी अन्य कंपनी को बेचा जाता है, तो गूगल खाते के साथ क्रोम का एकीकरण प्रभावित हो सकता है। उपयोगकर्ताओं को साइन-इन, बुकमार्क्स और अन्य सेवाओं में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, नए मालिक द्वारा डिफ़ॉल्ट खोज इंजन में परिवर्तन किया जा सकता है, जिससे खोज अनुभव में भी बदलाव संभव है।
DOJ की यह कार्रवाई गूगल के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। यदि क्रोम ब्राउज़र की बिक्री होती है, तो यह न केवल गूगल के व्यवसाय मॉडल को प्रभावित करेगा, बल्कि इंटरनेट ब्राउज़िंग की दुनिया में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में इस मामले के कानूनी परिणाम और उनके प्रभाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
क्रोम बेचने को लेकर क्या है DOJ दलील?
अमेरिकी सरकार का कहना है कि गूगल ने इंटरनेट वर्ल्ड और सर्च इंजन के अपने प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए कई अनुचित तरीके अपनाए है। गूगल पर आरोप हैं कि उसने स्मार्टफोन और लैपटॉप में वेब ब्राउजर में Google Search को डिफॉल्ट सर्च इंजन सेट करने के लिए कंपनियों को अरबों रुपये का भुगतान किया है। DOJ का दावा है कि अमेरिका में 70% से ज्यादा सर्च रिजल्ट्स पर गूगल का कंट्रोल है। गूगल की इस रणनीति से छोटे सर्च इंजन प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए हैं।
DOJ ने अपनी दलील में कहा है कि गूगल अपनी इन्हीं रणनीतियों के चलते बेहद ताकतवर हो गया है। यह बाजार पर इस कदर हावी हो चुका है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां चाहे कुछ भी कर ले वे गूगल से जीत नहीं सकती हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने गूगल पर अवैध एकाधिकार का आरोप लगाते हुए उसके क्रोम ब्राउज़र की बिक्री की मांग की है, जिससे इंटरनेट उद्योग में बड़े बदलाव की संभावना है।