बद्रीनाथ, उत्तराखंड: बद्रीनाथ के समीप स्थित माना गांव में एक भीषण हादसा हुआ है, जहां ग्लेशियर टूटने से 57 मजदूर मलबे में दब गए। अब तक बचाव दल ने 15 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जबकि शेष 42 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से जारी है।
घटना का विवरण
यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर एक निर्माण परियोजना पर कार्यरत थे। अचानक ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा, जिससे मजदूर मलबे में फंस गए। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
इस घटना ने 2021 में इसी जिले में हुए ग्लेशियर हादसे की याद दिला दी है, जब नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से हिमस्खलन और बाढ़ आई थी, जिसमें व्यापक विनाश और जानमाल का नुकसान हुआ था।
बचाव कार्य
बचाव दल ने अब तक 15 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। शेष 42 मजदूरों को बचाने के लिए ऑपरेशन लगातार जारी है। बचाव कार्य में स्थानीय पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें शामिल हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ठंड के बावजूद, बचावकर्मी अपने प्रयासों में जुटे हुए हैं।

मौसम की चुनौती
वर्तमान में क्षेत्र में भारी वर्षा और बर्फबारी हो रही है, जिससे बचाव कार्य में कई चुनौतियां आ रही हैं। इसके बावजूद, प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया है। उन्होंने कहा, “चमोली जिले के माना गांव के पास बीआरओ द्वारा संचालित निर्माण कार्य के दौरान हिमस्खलन में कई मजदूरों के दबे होने की दुखद सूचना प्राप्त हुई है।

राहत एवं बचाव कार्य आईटीबीपी, बीआरओ और अन्य बचाव टीमों द्वारा किए जा रहे हैं। मैं भगवान बद्री विशाल से सभी श्रमिक भाइयों की कुशलता की प्रार्थना करता हूं।”
सुरक्षा उपाय
इस घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक स्थितियों का गहन अध्ययन करके ही कार्य प्रारंभ करना चाहिए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।