भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद मध्यप्रदेश के पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाया जाएगा ।

Vikash Kumar
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भोपाल गैस त्रासदी के चार दशक बाद, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में बचे जहरीले कचरे के निपटान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश दिया है कि इस कचरे का निस्तारण धार जिले के पीथमपुर में तीन चरणों में किया जाएगा। इस निर्णय के अनुसार, प्रत्येक चरण में 10 मीट्रिक टन कचरा जलाया जाएगा, और इसकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी जाएगी। बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।

हालांकि, इस फैसले के खिलाफ स्थानीय समुदायों और पर्यावरण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। उनका तर्क है कि कचरे के जलाने से क्षेत्र में रेडिएशन फैलने का खतरा है, जबकि पीथमपुर में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है, और अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की गई है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है। सफाई प्रक्रिया को अपर्याप्त बताते हुए आलोचना की गई है, क्योंकि 337 टन कचरे को हटाया गया है, जबकि साइट पर अभी भी लाखों टन जहरीला कचरा मौजूद है। साथ ही, द टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कचरे को पीथमपुर ले जाया गया है, जहां इसे जलाया जाएगा, लेकिन पर्यावरणविदों ने इस प्रक्रिया से संभावित प्रदूषण की चिंता जताई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश दिया है कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे का निस्तारण धार जिले के पीथमपुर में 27 फरवरी 2025 से शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत तीन चरणों में कचरे का निपटान किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में 135 किलोग्राम प्रति घंटा, दूसरे चरण में 180 किलोग्राम प्रति घंटा, और तीसरे चरण में 270 किलोग्राम प्रति घंटा की दर से कचरा जलाया जाएगा।

इस निर्णय के बाद, स्थानीय निवासियों और विभिन्न संगठनों ने पीथमपुर में कचरा जलाने के विरोध में प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से क्षेत्र में रेडिएशन फैलने का खतरा है, जबकि पीथमपुर में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 24 फरवरी 2025 को निर्धारित की गई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण के लिए पीथमपुर में 27 फरवरी से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है, जिसके विरोध में स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्या था मामला

भोपाल गैस कांड, जिसे भोपाल गैस त्रासदी भी कहा जाता है, 2-3 दिसंबर 1984 की रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घटित एक भयावह औद्योगिक दुर्घटना है। इस घटना में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ, जिससे हजारों लोगों की जान गई और लाखों लोग प्रभावित हुए।

घटना का विवरण:

2 दिसंबर 1984 की रात, यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर ‘सी’ में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव शुरू हुआ। इस जहरीली गैस के बादल ने आसपास के क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे लोग सड़कों पर बेहोश होकर गिरने लगे। कई लोग नींद में ही मौत के शिकार हो गए, जबकि अन्य सांस लेने में तकलीफ के कारण जान गंवा बैठे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों में 5,295 लोग मारे गए थे।

प्रभाव और वर्तमान स्थिति:

इस त्रासदी के 40 साल बाद भी, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा मौजूद है, जो अभी तक नष्ट नहीं किया जा सका है। इस कचरे को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया अब शुरू की गई है, जिसमें इसे इंदौर के पास पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस कार्य के लिए 126 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

न्यायिक हस्तक्षेप:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने इस जहरीले कचरे के निपटान को लेकर केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार और इंदौर सहित आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए संभावित जोखिम के मुद्दे पर जवाब मांगा है।

भोपाल गैस कांड भारतीय औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। चार दशकों के बाद भी, इसके प्रभाव और इससे जुड़े मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। जहरीले कचरे का सुरक्षित निपटान और प्रभावित लोगों को न्याय दिलाना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।

1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का जहरीला कचरा नष्ट नहीं किया जा सका है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।

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