अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 87 वर्ष की आयु में निधन।

Vikash Kumar
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 3 फरवरी को ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में भर्ती कराया गया था, जहां 12 फरवरी की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

जीवन परिचय:

आचार्य सत्येंद्र दास का जन्म में उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में हुआ था। संस्कृत में आचार्य की उपाधि प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण के सहायक शिक्षक के रूप में कार्य किया। 1992 में, उन्हें श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया, और तब से वे रामलला की सेवा में समर्पित रहे। आचार्य सत्येंद्र दास का जन्म 20 मई 1945 को संत कबीर नगर जिले में हुआ था। संस्कृत में आचार्य की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण के सहायक शिक्षक के रूप में कार्य किया। बाद में, 1992 में रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में नियुक्त हुए और जीवनपर्यंत इस भूमिका में रहे।

बाबरी विध्वंस के दौरान भूमिका:

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय, आचार्य सत्येंद्र दास ने रामलला की मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उसे गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। उनकी इस निष्ठा और साहस के लिए उन्हें व्यापक सराहना मिली।

स्वास्थ्य और निधन:

उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित आचार्य सत्येंद्र दास को 3 फरवरी 2025 को ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद उन्हें लखनऊ के SGPGI में भर्ती कराया गया। लगातार उपचार के बावजूद, 12 फरवरी की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

शोक संदेश:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “परम रामभक्त, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, श्री अयोध्या धाम के मुख्य पुजारी आचार्य श्री सत्येंद्र कुमार दास जी महाराज का निधन अत्यंत दुःखद एवं आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है।”

आचार्य सत्येंद्र दास का योगदान:

आचार्य सत्येंद्र दास ने अपने जीवन के 34 वर्ष रामलला की सेवा में बिताए। उनकी विद्वत्ता, निष्ठा और समर्पण के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन धार्मिक और आध्यात्मिक समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1992 से रामलला की सेवा में समर्पित आचार्य सत्येंद्र दास ने बाबरी विध्वंस के दौरान रामलला की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई प्रमुख व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया है।

आचार्य सत्येंद्र दास 1992 से रामलला के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा कर रहे थे। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी विध्वंस के दौरान उन्होंने रामलला की मूर्ति को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था, जिससे उनकी निष्ठा और साहस की सराहना हुई थी।

6 दिसंबर 1992 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद का विध्वंस भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद घटना है। इस घटना ने देश की राजनीति, समाज और सांप्रदायिक संबंधों पर गहरा प्रभाव डाला।

बाबरी मस्जिद का इतिहास:

बाबरी मस्जिद का निर्माण 1528 में मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर किया गया था। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस मस्जिद के स्थान पर पहले एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था। इस विवादित स्थल को लेकर सदियों से हिंदू और मुसलमान समुदायों के बीच विवाद चल रहा था। 1949 में कुछ हिंदू कारसेवकों ने मस्जिद के अंदर मूर्तियां रख दी थीं। इसके बाद 1950 में सरकार ने मस्जिद के आसपास के इलाके को अपने कब्जे में ले लिया और मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी गई थी।

विवाद की पृष्ठभूमि:

1984 में भारतीय उच्चतम न्यायालय ने विवादित स्थल को हिंदू और मुसलमान पक्षों में बांटने का फैसला सुनाया और फिर इस फैसले के बाद हिंदू संगठनों में नाराजगी बढ़ गई। 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने का अभियान शुरू किया था। इस अभियान के दौरान विवादित स्थल पर कारसेवकों की भीड़ इकट्ठा होने लगी थी।

विध्वंस की घटना:

6 दिसंबर 1992 को, लाखों कारसेवक अयोध्या में एकत्रित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे के सामने सिर्फ भजन-कीर्तन करने की इजाजत दी थी, लेकिन भीड़ उग्र हो गई और बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया। कहा जाता है कि उस समय 1.5 लाख से ज्यादा कारसेवक वहां मौजूद थे।

परिणाम:

इस घटना के बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिनमें हजारों लोगों की जान गई और लाखों लोग बेघर हो गए। यह घटना भारतीय समाज के ताने-बाने को हिला देने वाली थी।

न्यायिक प्रक्रिया:

विध्वंस के बाद कई न्यायिक जांच आयोग गठित किए गए और लंबी कानूनी लड़ाई चली। 28 साल बाद, 30 सितंबर 2020 को सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया, यह कहते हुए कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी।

वर्तमान स्थिति:

9 नवंबर 2019 को, सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि को राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू पक्ष को सौंपने का निर्णय दिया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अलग से 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया। वर्तमान में, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “धार्मिक अनुष्ठानों और शास्त्रों के ज्ञाता रहे महंत जी का पूरा जीवन भगवान श्री राम की सेवा में समर्पित रहा।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और इसे आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति बताया।

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